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पाकिस्तान में हिंदू मंदिर को अपवित्र करने वाले 85 संदिग्धों पर सुनवाई शुरू

  • बदमाशों ने मंदिर के कुछ हिस्सों को जला दिया और मंदिर के अंदर की मूर्तियों को क्षतिग्रस्त कर दिया।

पाकिस्तान के रहीम यार खान जिले में एक गणेश मंदिर पर हमले में शामिल 85 संदिग्धों के खिलाफ शुक्रवार को आतंकवाद विरोधी अदालत में सुनवाई शुरू हुई। चार अगस्त को लाहौर से 590 किलोमीटर दूर पाकिस्तान के भोंग में कई सौ लोगों ने लाठियां, पत्थर और ईंटें लेकर मंदिर पर हमला किया था।

बदमाशों ने मंदिर के कुछ हिस्सों को जला दिया और मंदिर के अंदर की मूर्तियों को क्षतिग्रस्त कर दिया। उन्होंने दावा किया कि वे हिंदू समुदाय के एक आठ वर्षीय बच्चे की रिहाई का विरोध कर रहे थे, जिसे एक स्थानीय मदरसा में कथित तौर पर पेशाब करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। उन्होंने मंदिर को अपवित्र करते हुए दीवारों, दरवाजों और बिजली के फिटिंग को क्षतिग्रस्त कर दिया।

पंजाब प्रांत के एक अधिकारी ने समाचार एजेंसी पीटीआई को बताया, “पुलिस द्वारा आतंकवाद निरोधी अदालत को रिपोर्ट सौंपे जाने के बाद मंदिर हमले के मामले में गिरफ्तार किए गए 85 संदिग्धों पर आज सुनवाई शुरू हुई।” इन सभी को न्यायिक रिमांड पर बहावलपुर शहर की न्यू सेंट्रल जेल में हिरासत में लिया गया। सरकारी अधिकारी ने बताया कि संदिग्धों के पास से 10 लाख पाकिस्तानी रुपया (पीकेआर) का मुआवजा बरामद किया गया है।

अधिकारी ने आगे कहा, “चूंकि हमले के तुरंत बाद सरकार द्वारा गणेश मंदिर का जीर्णोद्धार किया गया था, सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया था कि हमलावर अपनी जेब से बहाली की राशि का भुगतान करेंगे।” उन्होंने यह भी कहा कि मंदिर के अंदर से जीर्णोद्धार का काम पूरा हो चुका है लेकिन मंदिर की सीमा पर काम चल रहा है.

25 जुलाई को भोंग जिले के एक निवासी ने पुलिस को बताया कि उसने मदरसा के पुस्तकालय में एक लड़के को पेशाब करते हुए देखा और उसे पकड़ने की कोशिश करने पर लड़का भाग गया। आठ से 10 साल की उम्र के लड़के को 26 जुलाई को गिरफ्तार किया गया था और उसे अदालत में पेश किया गया था। लड़के को फिर न्यायिक रिमांड पर भेज दिया गया लेकिन गिरफ्तारी के बाद 28 जुलाई को रिहा कर दिया गया।

पंजाब प्रांत पुलिस ने मंदिर में तोड़फोड़ करने के आरोप में 150 संदिग्धों के खिलाफ आतंकवाद और पाकिस्तान दंड संहिता की अन्य धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज की है। पाकिस्तान के मुख्य न्यायाधीश गुलजार अहमद ने पुलिस की आलोचना की और कहा कि उनकी निष्क्रियता ने देश को शर्मसार किया है।

पाकिस्तान के मुख्य न्यायाधीश ने कहा, “कल्पना कीजिए कि अपवित्रता की घटना ने हिंदू समुदाय के सदस्यों को कितनी मानसिक पीड़ा दी थी।” इस घटना की भारत के साथ-साथ पाकिस्तान में अल्पसंख्यक समुदाय के नेताओं की भी तीखी आलोचना हुई। पाकिस्तान की संसद ने बाद में हमले की निंदा करते हुए एक प्रस्ताव पारित किया।

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